सोमवार, 8 जून 2015

पर्यावरण (कविता एवं मुक्तक)

वृक्षों से मिलती है स्वच्छ हवा
लोग वृक्षों को क्षति  न पहुचाएं।
इन्हीं से मिलती है सुन्दरता
इस सुन्दर सुगंध को न गवाएं।
महत्वपूर्ण हिस्सा जिन्दगी के हैं
अपने परिवार का अंग बनाएँ।
बच्चों की तरह इन्हें जन्म देकर
सुन्दर सबका भविष्य बनाएँ।
वायुमंडल का संतुलन बनाकर
निशुल्क प्रदान करते हैं सेवाएं
वातावरण को शुद्धिकरण कर
जीवों को प्राणवायु उम्र भर दिलाए।
हमारे आवरण बन-रक्षा-कर
जीवन की नईया पार लगाते
इर्द-गिर्द कवक्ष-बन-कर
आपदाओं से रक्षा करते।
बाढ़ -सुखाड़ की कमी कर के
अच्छे मानसून को बुलाते
इसी मानसून पर निर्भर हो के
पृथ्वीतल पर अच्छा माहौल बनाते।
पर्यावरण  पर  संकट घहराया है
मानव ही इस कुकृत्य को रचाया है
जल,ध्वनि प्रदूषण कहीं करता है
कहीं करता है वायु ,मृदा प्रदुषण।
सब मिलकर परि-आवरण को
शुद्ध कर स्वच्छता का आनंद ले
यही है असली मानवता का धर्म।
यही करने का जिन्दगी में संकल्प ले।
@रमेश कुमार सिंह / ०५-०६-२०१५
        ~~~~~मुक्तक ~~~~
पर्यावरण का सुरक्षा  करना हमारा धर्म है
वृक्ष और पौधा लगाना यही हमारा कर्म है
इससे वायुमंडल का संतुलन हो जाता है
पृथ्वी को हरा भरा करना यही सत्कर्म है
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
दुनिया वालों से हमारा एक यही पुकार है
बच्चों की भान्ति वृक्षों का सत्कार करना है
वृक्षों से धरा को सजाने और सँवारने के लिए,
वृक्षारोपण  के लिए सभी को प्रेरणा देना है
@रमेश कुमार सिंह

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